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ईद आई यार ईद आई (Kavita)

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ईद आई यार ईद आई  ईद आई यार ईद आई। यार को यार बना, ईद आई। कोई मिले ना मिले, तू तो गले लगा,ईद आई। मीठी सवाईयाँ मीठी शीर,मीठी-मीठी बातें,ईद आई। मोहल्ले के बच्चे मोहल्ले के लोग। लगा गले, ईद आई। यार को यार बना ईद आई। कोई रुसवा,कोई नाला हैं,उसको माना,ईद आई। नए कपड़े बना तो बराबर में देख, ईद आई । कोई रो रहा है खुश कर, ईद आई। किसी का चूलाह ना जला,उसका चूल्हा जला, ईद आई। ख़ुद खाने से पहले उसको खिला, ईद आई। ईदी ख़ुशबू हैं, इसको दूर तलक फेला, ईद आई। यार को यार बना,ईद आई। यार को यार बना ईद आई। तोहफ़ों का क्या दोस्तों को घर बुला, कुछ मीठा खिला कुछ चटपटा खिला,ईद आई। मुलाकातों में मिठास को मिला, ईद आई। दूर विदेश में किसी का इंतज़ार करता हैं। उनको गले लगा, ईद आई। माँ बाप को गले लगा, ईद आई। गिले शिकवें दूर भगा, ईद आई। किसी के मातम को अपना बना,ईद आई। जो जा चुके,शहीद हो चुके, जो लड़ते हैं, उनके घरों को रोशन कर,ईद आई। आज ईद है, खुशियों का दिन है  सज कर चल, सर पर ताज लगा,ईद आई।।