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Facebook ki kahani ek gular ka ped I het( part-2)

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Khatta Abhi tala nahi  "फेसबुक खतरा अकेला नहीं और भी हैं" पार्ट -2  - दोमुख ने पूछा ' चील आंटी इसमें हमारा क्या नुक्सान हैं पैसा सरकार दे या कंपनी।"  -चील आंटी मुस्कुराई- "नुक्सान अब शुरू होता हैं आप लोगो का यानि पेड़ समुदाइयो का, जिससे भी यानिबन जाता हैं उस  तुम्हारे मौसा ताऊ जिससे भी सरकार को खतरा महसूस होता हैं सरकार उसका पेज ब्लॉक करा देती हैं। रोज़ ऑफिस से लिस्ट भेज दी जाती हैं विपक्ष के पेज हो या सरकार की नीतिओ के खलाफ लिखने वाले हो या सेकुलर, कम्यूनिस्ट आदि हो सभी को फेसबुक पर ब्लॉक करने ही मुख्य काम बन जाता हैं"- "वो तो ठीक हैं हमारा तो नहीं ब्लॉक होता, और इससे हमारा क्या ताल्लुक़ हैं, हम किस तरह इससे मुतास्सिर होंगे?" - हसमुख ने पूछा।- " नुक्सान तुम्हारे इस्तेमाल से होता हैं. तुम उनके द्वारा झूट फैलाने में मदद करते हो तुम खुद चेक नहीं करते के जो में पोस्ट भेज रहा हूँ वो सही भी या झूट से भरी तो नहीं कही हमरे किसी पेड़ भाई को नुक्सान तो नहीं उठाना पड़ेगा।यहाँ तक तो ठीक हैं जब सरकार का तुम सभी पेड़ो पर अधिकार हो जायेगा कोई...

"ललन की माँ तुझ पर चुप क्यों हैं लोग" "Why are people silent on Lalan's mother"

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"हमारा पेड़" दिनांक-22 - मार्च -2020 सुना है हर पेड़ कुछ कहता है! "इज़हार आलम की क़लम से " "ललन की माँ,तुझ पर चुप क्यों हैं लोग" हमारा पेड बड़ा हरा भरा हैं।  इस पर तरह तरह के पंछी आकर आराम करते या अपना घोसला बनाते। इसका आकर भी बड़ा हैं। इस पेड़ पर एक चील आंटी का घोषला, एक छोटी गुरराय का घोंसला हैं. साथ ही मधुमखीओं का भी छत्ता कहे या घर ख़ैर जो भी कहो वो हैं बड़ा. ये इस पेड़ महाशय के काफी करीबी दोस्त बन चुके हैं हर दो साल में ये यहाँ आकर अपना घर बनते हैं और 4-8 महीने रहते हैं जब नए पत्ते आ जाते हैं ये यहाँ से घर छोड़ कही और चली जाती हैं इसी तरह चक्र चलता रहता हैं।इस पेड़ का।     ये सड़क के काफी बड़े हिस्से पर फैला हुआ हैं.  इसके निचे यहाँ के रहने वालो ने एक तख़त डाला हुआ हैं. जिस पर दिन रात यहाँ के लोग विराजमान रहते कभी यहाँ के लड़के बैठते कभी बुजुर्ग बैठे हंसी मज़ाक करते रहते हैं।  ये पेड अपने में अनेक किस्से लिए बैठा हैं। सायद ये अब एक एक कर सभी किस्सों को मुझे सुनाने को बेताब हैं। इस  पेड में जितने पत्ते हैं उतने किस्से हैं पिछले किस्से...