संदेश

SOORMA सुरमा बिना गॉड फादर के "

चित्र
"सूRMA  सुरमा बिना गॉड फादर के " "सूरमा" दिलजीत दोसाँद की बेहतरीन एक्टिंग, हॉकी के सब्जेक्ट पर " चक-दे-इंडिया " और सूरमा जैसी फिल्म बनी ओर कामयाब भी हुई. मगर मैं आज इन दो चलचित्र (मूवी) की आप से बात नहीं करने जा रहा हूँ। मैं आज हॉकी की अपनी प्रेम कथा और इस खेल के सूरमा की बात करने जा रहा हूँ जैसा संदीप सिंह के जीवन की घटनाओ से प्रेरित होकर, एक शानदार फिल्म बनाई गई हैं ।    मैं कल रात इस फिल्म को देख रहा था फिल्म में जैसे जैसे किरदार बनता जा रहा था उसके साथ होने वाली घटनाए भी बढ़ती जा रही थी. फिल्म के देखते देखते मुझे अपना अतीत या यु कहे मुझे अपने स्कूल टाइम के समय की हॉकी खेलने की कहानी फिल्म के द्रश्यो की माफिक आँखों के सामने बारी-बारी आती गई। अब आप पूछेंगे ऐसा क्या तीर मार लिए स्कूल में। और कोई न कोई खेल स्कूल में तो सभी खेलते हैं। मगर खेल तब खाश बन जाता हैं जब यमुना पार के टेंट वाले स्कूल हो। जिसमें सुविधाओं के नाम पर बस कपडे के टेंट और बैठने के लिए टाट और बड़ी क्लास के लिए टूटे डे...

Monkey's Bumble! Because I am a monkey "बंदर का मिमियाना ! कियूँकि मैं एक बन्दर हूँ"

चित्र
वक़्त क्या क्या करा देता हैं, "मड़रगट्टू" साहब  की न सुनो तो न्यूज़ घरोंदा  बंद करवा देता हैं।  तभी तो मैं   "मड़रगट्टू" साहब का दीवाना हूँ जैसी उनकी सोच वैसी मेरी करनी, देखो में कैसे चिल्लाता हूँ।  क्यूँ? कियूँकि मैं  एक बन्दर हूँ" .  Every tree says something, I have started writing on this subject. Some things happen on the tree. On which there is a story between the leaves and the living birds who tell each other the day-to-day story. They are written in Hindi but will translate it into English, and Urdu too. बंदर का मिमियाना !  कियूँकि  मैं  एक बन्दर हूँ" वक़्त क्या क्या करा देता हैं, "मड़रगट्टू" साहब  की न सुनो तो न्यूज़ घरोंदा  बंद करवा देता हैं।  तभी तो मैं  "मड़रगट्टू" साहब का दीवाना हूँ जैसी उनकी सोच वैसी मेरी करनी, देखो मैं कैसे चिल्लाता हूँ।  क्यूँ? कियूँकि मैं एक बन्दर हूँ"                        @TweetManki ...

गिद्धों का आतंक- गिद्ध क्या कर रिया हैं?

चित्र
गिद्ध क्या कर रिया हैं? " एक कबूतर ने पतंग के धागे में लिपट कर अपने घोसले में आत्महत्या कर ली, वो कबूतर अपनी सोसाइटी में एक जाना पहचाना नाम हो चूका था। खूबसूरत तो था ही अपनी नसल का बेहतरीन कबूतर था. अदाकार था। मगर वो अंदर ही अंदर घुलता जा रहा था कोई परेशानी उसको खाई जा रही थी। मगर वो उन परेशानिओ के सामने डट कर ज्यादा देर खड़ा न पाया ओर हार गया।और वो इस संसार को अलविदा कह गया। "    "Every tree says something, I have started writing on this subject. Some things happen on the tree. On which there is a story between the leaves and the living birds who tell each other the day-to-day story. They are written in Hindi but will translate it into English, and Urdu too. गिद्ध क्या कर रिया हैं गिद्धों का आतंक                  आ ज चील भिन भिना रही थी। अभी इस डाल कही पर तो कभी उस डाल। बेचैनी बढ़ती जा रही थी। कभी इधर देखती कभी उधर देखती, जब रहा नहीं गया तो दोमुखी ने चील से पूछ ही लिया।  "आंटी क्या बात हैं आप त...

आज फिर से ख़ामोशी हैं,

चित्र
आज फिर से ख़ामोशी हैं आ ज फिर से ख़ामोशी हैं, आज फिर से कोई रोया हैं।  देखो तो सही कही कोई इंसा भूखा सोया हैं।  तुम भी जाओ, वो भी जाएँ, देखो कोई रह न जाये, सब जाएँ।  देखना हैं मुझको, इस खामोशी में कोई दफन तो नहीं।    वास्ता पूछते हो मेरा उससे, देखो तो सही खुद अपना भी पता मालूम नहीं।  खुद चले हो दीवाना होने के लिए, और कहते हो तुम दीवाने हो।  ज़रा संभलना, कही उस घर की मिटटी में कुछ अपनी सी खुशबू तो नहीं।   न जाने बदलो में कोन सी गुफ़्तगू हुई, बारिश के बीच भी एक होड़ सी हुई। में रोकता रह गया, मेरा ही घर सेहर में था, वही बारिश हुई।  अब टूटे घर में पानी, पानी हैं. जब उसने पूछा, कोई यहाँ दफ़न तो नहीं।  ख़ामोश रहता तो सायद आज में भी खुशगवार होता।  किसी ने मुझे चढ़ा कर अपना मुफीद सीधा कर लिया। .  इस ख़ामोशी का अंदाजा कही यूं ही तो नहीं।   कही मैं,मैं न रहूं, कही तुम तू न रहों ।  लेखक  इज़हार आलम देहलवी  writerdelhiwala.com  हम गरीब तो न थे पर गरीब से कुछ कम न थे , जब पूछा,...

“हम और तुम”- hum-tum-or- ye- book

चित्र
“हम और तुम”                               ___________________ “हम और तुम” "आ ओ देखे कुछ किताबों को ।   शायद  मिल जाये अतीत इन किताबों में.  आओ पढ़े इन किताबों को,  चलो बैठो, तुम कही गुम हो, चुप हो, खामोश हो।  आओ यहाँ बैठो, शायद  कुछ मिल जाए,कुछ छुपा हुआ, इन किताबों में।  मैं बैठा हूँ डरो नहीं, बैठो तो सही,  लो पकड़ो इन किताबों को,  मेरे पास शायद कुछ किताब हैं, चलो पढ़ते हैं इन लाल हरी काली दस्ते वाली किताबों को । तुम जो किताब लिए बैठे हो शायद वो मेरी जिन्दागी हो तो कियूं न हम साथ साथ बैठ पड़ते एक और क़िताब। जिसका नाम हो “हम और तुम” लेखक  इज़हार आलम देहलवी  www.writerdelhiwala.com

Facebook ki kahani ek gular ka ped I het( part-2)

चित्र
Khatta Abhi tala nahi  "फेसबुक खतरा अकेला नहीं और भी हैं" पार्ट -2  - दोमुख ने पूछा ' चील आंटी इसमें हमारा क्या नुक्सान हैं पैसा सरकार दे या कंपनी।"  -चील आंटी मुस्कुराई- "नुक्सान अब शुरू होता हैं आप लोगो का यानि पेड़ समुदाइयो का, जिससे भी यानिबन जाता हैं उस  तुम्हारे मौसा ताऊ जिससे भी सरकार को खतरा महसूस होता हैं सरकार उसका पेज ब्लॉक करा देती हैं। रोज़ ऑफिस से लिस्ट भेज दी जाती हैं विपक्ष के पेज हो या सरकार की नीतिओ के खलाफ लिखने वाले हो या सेकुलर, कम्यूनिस्ट आदि हो सभी को फेसबुक पर ब्लॉक करने ही मुख्य काम बन जाता हैं"- "वो तो ठीक हैं हमारा तो नहीं ब्लॉक होता, और इससे हमारा क्या ताल्लुक़ हैं, हम किस तरह इससे मुतास्सिर होंगे?" - हसमुख ने पूछा।- " नुक्सान तुम्हारे इस्तेमाल से होता हैं. तुम उनके द्वारा झूट फैलाने में मदद करते हो तुम खुद चेक नहीं करते के जो में पोस्ट भेज रहा हूँ वो सही भी या झूट से भरी तो नहीं कही हमरे किसी पेड़ भाई को नुक्सान तो नहीं उठाना पड़ेगा।यहाँ तक तो ठीक हैं जब सरकार का तुम सभी पेड़ो पर अधिकार हो जायेगा कोई...

facebook ki mehrbaan. rachi kahani gular ka ped i het",फेसबुक की मेहरबानी, एक रची कहानी "गूलर का पेड़ आई हेट"

चित्र
फेसबुक की मेहरबानी, एक रची कहानी  "गूलर का पेड़ आई हेट"                "फे सबुक कितना भी इस्तेमाल कर लो मन नहीं भरता"- हसमुख अपने मोबाइल की स्क्रीन पर फेसबुक की न्यूज़ पढ़ रहा था लोगो के डेली डाले जाने वाले मीम और पोस्ट बड़े चाओ से देख रहा था। दोमुख, चांदमुखी दोनों हसमुख के उस रिएक्शन को देख रहें थे जिसको पढ़ कर हसमुख कभी हसंता तो कभी गुस्से में बड़बड़ करता।  काफी देर हो चुकी थी रात के सायद 1 बजे होंगे। दोमुख से जब रहा नहीं गया तो उसने हसमुख के कंधे पर हाथ मारा और दुसरी और से उसका मोबाइल झपट लिया। -"अरे अरे कौन चोर हैं" -हसमुख घबराया, पीछे मुड़ कर देखा तो चांदमुखी और दोमुख मुस्कुरा रहे थे।  " यार ऐसा मत किया कर में घबरा जाता हूँ मेरा छोटा सा दिल बेठ सा जाता हैं।" - दोमुख ने मोबाइल के फेसबुक के उसके पेज को स्क्रोल करना शुरू किया उसमें तो पेड़ो से सम्बंधित हेट न्यूज़, स्पीच भरी पड़ी थी। दोमुख ने चांदमुखी को मोबाइल की स्क्रीन दिखाते हुए सवाल किया। "देखो देखो इस न्यूज़ को क्या तुम भी ऐसा ही सोचती हो हसमुख के...