Holi
होली
रंग लिए हाथों,
घूम रहा था बीच बाज़ार,
मैं कुछ आड़ में ढूंड रहा था,
शिकार,
अभी दो टोली पास में थी भिड़ी,
देख उनको मारे हसीं,
पेट पकड़ाए,
लोटपोट होए जाए,
तभी पीछे से,
किसी ने जो लपेटा,
गुलाल के आगोश में,
सम्भलने का ना मिला मोका?
हमारे और उनके बीच,
हुआ खूब घमासान,
लिए दोनों हाथो में गुलाल,
पूरे बाज़ार को जब हमने रंगा
तो सबने ज़ोर से कहा,
“होली मुबारक”.
-writer delhi wala-

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